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सेक्स पर भारतीयों के होते हैं ऐसे सवाल

90 साल के न्यूजपेपर कॉलमनिस्ट डॉ. महिंदर वत्स हर दिन सुबह स्टडी के लिए बैठ जाते हैं। अपार्टमेंट की जिस ऊंचाई पर बैठे हैं वह अरब सागर की दिशा में है, जहां हवा का झोंका मिजाज खुश करने वाला होता है। देश भर से आई गुमनाम चिट्ठियों से पहले वह हाथ से लिखी गई गांव से आई चिट्ठियों को देखते हैं। कुछ मेल भी आई हैं। सारे लोग सेक्स से जुड़े तमाम कन्फ्यूजन को दूर करना चाहते हैं।

सेक्सपर्ट डॉ. वत्स
सेक्सपर्ट डॉ. वत्स

एक शख्स ने डॉक्टर वत्स के समाने अपनी समस्या रखी है, ‘मेरे दोस्तों ने मुझे नहाते वक्त लिया था। उनके मुताबिक मेरे पेनिस की साइज काजू के दाने से बड़ा नहीं है। मैं क्या करूं ताकि साइज में इजाफा हो।’ एक और सवाल है, ‘यदि पुरुष और महिला एक ही वक्त सेक्स के बारे में सोचते हुए हस्तमैथुन करते हैं तो क्या प्रेग्नेंसी की संभावना है?’ एक सवाल है कि क्या गुदा सेक्स में भी प्रेग्नेंसी की संभावना रहती है? डॉ. वत्स ऐसे सवालों पर न तो हंसते हैं और न ही माथा पीटते हैं। वह इन सवालों को ध्यान से पढ़ते हैं और फिर निपटाते हैं।

डॉ. वत्स इस बात को कबूल करते हैं कि कई बार इन सवालों पर खीझ पैदा होती है। कई ऐसे सवालों का वत्स जवाब भेजते हैं। लोग अपने साइज के बारे में ऐसे उटपटांग सवाल पूछते हैं कि डॉ. वत्स चिढ़ जाते हैं और कहते हैं कि कुछ बुनियादी जानकारी के लिए गूगल के पास जाओ और अपनी जिज्ञासा शांत कर लो। सेक्स को लेकर हमारी संस्कृति आसक्त और घबराई हुई है। मुंबई मिरर के सेक्सपर्ट कॉलमनिस्ट के रूप में डॉ. वत्स बताते हैं कि इंडियन पॉप्युलर कल्चर में लोग पीनिस और वजाइना के बारे में बच्चों की तरह सोचते हैं।

 9 सालों से ज्यादा समय से डॉ. वत्स डेली न्यूजपेपर में कॉलम लिख रहे हैं। डॉ. वत्स के पास 40,000 से ज्यादा पत्र सेक्स से जुड़ी समस्याओं पर आ चुके हैं। इसमें ज्यादातर लोग सेक्स से जुड़े बेसिक पहलू को जानने की इच्छा रखते हैं। सेक्स से जुड़ी शिक्षा के मामले में देश में शून्यता के बीच डॉ. वत्स सभी को बारी-बारी से जवाब भेजते हैं। सरकार की स्डडी के मुताबिक देश में सेक्स एजुकेशन की स्थिति बेहद बुरी है। इसी वजह से ज्यादातर लोगों में बचकाने किस्म के भ्रम मौजूद हैं।

वत्स के मुताबित भारतीय इतिहास कई तरह के संक्रमणों के दौर से गुजरा है। इसमें कई तरह के पाखंड और पूर्वाग्रह भी हैं। ऐसे में सेक्स को लेकर भी अजीब तरह के मिथ भी मौजूद हैं। सेक्स और वर्जिनिटी के लेकर कई तरह की धारणाएं मौजूद हैं। सेक्स सर्वे में बताया जाता है कि भारतीयों की वर्जिनिटी देर से खत्म होती है। औसत 23 की उम्र में वर्जिनिटी खत्म होती है। देश में ज्यादातर शादियां पैरंट्स के माध्यम से अरेंज होती हैं। एक तिहाई भारतीय आज भी उम्मीद लगाए रहते हैं कि उन्हें दुल्हन वर्जिन मिले।

ऐसे में जब वर्जिनिटी किसी भी तरीके खत्म होती है तो उन पर प्रेशर होता है कि इसे फिर से कृत्रिम तरीके से दुरुस्त किया जाए। वत्स कई तरह के डेटा को पेश करते हैं। इनका काम ज्यादातर मुंबई में है इसलिए डॉ. वत्स मुंबई के कुछ दिलचस्प डेटा प्रस्तुत करते हैं। डॉ. वत्स ने कहा कि मैंने वैसे कपल्स देखे हैं जिनकी शादी तीन साल पहले हुई यहां तक कि कुछ कपल्स की शादी 10 साल पहले हुई लेकिन अभी तक शारीरिक संबंध नहीं बने। इसके कारण हैं फिजियोलॉजिकल प्रॉब्लम और पैरालायजिंग टेंशन। इन रिश्तों में वैसे लोगों को स्पेस मिलती है जिनका इन कपल्स से कोई लेना देना नहीं है। जिनके पति विदेशों में नौकरी कर रहे हैं वहां 14 से 15 साल के लड़कों को बेड पर बुलाया जाता है।

डॉ. वत्स के मुताबिक फेक वर्जिनिटी का धंधा भी मुंबई में खूब बढ़ रहा है। लड़कियां खुद को वर्जिन दिखाने के लिए कृत्रिम हाइमन रीकंस्ट्रक्ट करवाती हैं। शादी की पहली रात के लिए खुद को फिर से वर्जिन बनाने का फैशन जोरों पर है।

अपनी शादी के बचाने के नाम पर फिर से वर्जिन बनाने का धंधा आने वाले वक्त में और बढ़ेगा। लेकिन सेक्स के मामले में पुरुषों में सबसे ज्यादा कुंठा है। ये अपने पीनिस के साइज, शेप और एंगल को लेकर बेहद परेशान और निराश रहते हैं। अपनी नपुंसकता को लेकर भी मर्द बेहद परेशान रहते हैं। ये हस्तमैथुन करते हैं तो डरते हैं कि कहीं उनकी सेक्स क्षमता तो प्रभावित नहीं हो रही है। भारतीय पुरुष सेक्स के मामले में हमेशा डरे और कई तरह की गलतफहमियों के शिकार होते हैं।

डॉ. वत्स के पिता मिलीटरी में डॉक्टर थे। इनकी ट्रेनिंग स्त्री प्रसूति विज्ञान और गाइनकॉलजिस्ट के रूप में हुई है। इनकी जॉइनिंग फैमिली प्लानिंग असोसिएशन में बतौर प्रोग्रेसिव ऐक्टिविस्ट के रूप में हुई थी। डॉ. वत्स ने सेक्स एजुकेशन और गर्भनिरोधक को जमकर प्रमोट किया है। पर इन्होंने क्वॉलिटी ऑफ सेक्शुअल लाइफ पर जमकर काम किया। डॉक्टर वत्स देश में सेक्स एजुकेशन की जमकर वकालत करते हैं। वत्स ने बताया कि मुंबई मिरर की संपादक मीना बघेल ने मुझसे संपर्क कर सेक्सपर्ट का आइडिया पेश किया था। यह पहली बार था जब इंडिया के किसी न्यूजपेपर में सेक्स लाइफ को इतनी तरजीह दी गई। सेक्सपर्ट के रूप में डॉ. वत्स का कॉलम मुंबई में बेहद चर्चित रहा। डॉ. वत्स का कॉलम घर-घर में पढ़ा जाने लगा।

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