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2500 बच्चों की आंखों में परेशानी

राष्ट्रीय अंधता निवारण सर्वे में परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चों की आंखों में दृष्टिदोष पाया गया है। सर्वे में करीब 7000 छात्र-छात्राओं की आंखों का टेस्ट किया गया था। इनमें करीब 2500 बच्चों की आंखों में दृष्टिदोष पाया गया है। इन बच्चों को चश्मा दिया गया है। सीएमओ दीपक ओहरी ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राष्ट्रीय अंधता निवारण प्रोग्राम में अप्रैल 2014 से फरवरी 2015 तक सर्वे किया गया। परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले 7000 छात्र-छात्राओं के आंखों की जांच की गई। इसमें 2500 स्टूडेंट्स की आंखों में दोष पाया गया। सभी बच्चों की उम्र 7 से 14 साल के बीच है। सीएमओ ने बताया कि जिन छात्र-छात्राओं की आखों में परेशानी है उन्हें चश्मा दिया गया है। और नोडल अधिकारी को बच्चों के स्वास्थ्य पर ध्यान देने के निर्देश जारी किए गए हैं। आखों के विशेषज्ञ डॉ. अखिलेश कुमार ने बताया कि कई बार बच्चों में जन्म से ही आंखों की समस्याए होती है। बच्चें के जन्म के बाद उनकी आंखों की जांच करवाना जरूरी होता है। अगर जांच के दौरान कोई समस्या शुरुवाती अवस्था में ही हो तो उसे ठीक कराना आसान होता है। बच्चे की उम्र बढ़ने के साथ समस्याएं भी बढ़ती जाती हैं। अखिलेश ने बताया कि कई बार बच्चों की आंखों में इनफेक्शन की समस्या हो जाती है जिसे कंजक्टिवाइटिस नाम से जाना जाता है। इस पिंक आई के नाम से भी जानते है। अक्सर साफ सफाई में लापरवाही की वजह से यह बीमारी फैलती है। आमतौर पर इस बीमारी में आंखे लाल हो जाती हैं। पहले आंख की बाहरी लेयर लाल होती है फिर पूरी आंख लाल हो जाती है। कंजक्टिवाइटिस की समस्या वायरल भी हो सकती है और बैक्टीरियल भी। उन्होंने बताया कि कमजोर और मीठा ज्यादा खाने वाले बच्चों में भी स्टाई ज्यादा निकलती है। बच्चों की आंखे काफी नाजुक होती हैं इसलिए उन्हें खास देखभाल की जरूरत होती है। बच्चे बार-बार आंखों पर हाथ लगाते हैं जिसकी वजह से आंखों में संक्रमण की आशंका बनी रहती है।


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