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ऑस्ट्रेलिया हाई कमिश्नर मैली गंगा देखकर हैरान

ऑस्ट्रेलिया हाई कमिश्नर मैली गंगा देखकर हैरान

वाराणसी

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री टोनी एबॉट से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर में गंगा को निर्मल करने के लिए सहयोग मांगा था। इसी कड़ी में ऑस्ट्रेलिया के हाई कमिश्नर पैट्रिक सकलिंग बनारस के दो दिनी दौरे पर आए। गंगा में गिरते नालों के मैली गंगा को देखकर वह हैरान हो गए वहीं गंगा आरती देखकर अभिभूत भी हुए।

गंगा की सफाई के लिए पिछले तीन दशक से जुटे संकट मोचन फाउंडेशन के प्रफेसर विश्वम्भरनाथ मिश्र के साथ वह गंगा की सफाई को लेकर काफी देर तक चर्चा किए। ऑस्ट्रेलिया हाई कमिश्नर के साथ गंगा की सफाई को लेकर इस मंत्रणा के दौरान बीएचयू आईटी के पूर्व निदेशक प्रफेसर एसएन उपाध्याय भी मौजूद थे।

गंगा का हाल देखने के बाद ऑस्ट्रेलिया के हाई कमिश्नर ने बातचीत में कहा कि गंगा को साफ करने के लिए ‘नामिम गंगे मिशन’ में ऑस्ट्रेलिया हर मदद करने को तैयार है। संकट मोचन फाउंडेशन की गंगा प्रयोगशाला देखने के साथ अब तक हुए शोध कार्यों की सराहना करते हुए गंगा मैली होने के कारणों की चर्चा करते हुए इसमें गिरते नालों को देखकर अचंभित भी हुए।

पैट्रिक ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया गंगा को स्वच्छ एवं निर्मल करने के अभियान में हर मदद करने को तैयार है ताकि गंगा बेसिन के इलाकों में लोगों को शुद्ध जल के साथ अच्छा अनाज और बेहतर सेहत का लाभ मिल सके।

गंगा प्रदूषण की ऑस्ट्रेलिया सरकार को जाएगी रिपोर्ट
भारत और ऑस्ट्रेलिया सरकार के बीच गंगा निर्मलीकरण को लेकर जो समझौता हुआ उसके तहत ऑस्ट्रेलियाई हाई कमिश्नर का दौरा काफी महत्वपूर्ण है। सोमवार को जाने से पहले उन्होंने कहा कि मैं गंगा सफाई में जुटे लोगों से बातचीत करने के साथ इसके प्रदूषण के कारणों की पड़ताल के साथ इसके निवारण को लेकर एक रिपोर्ट ऑस्ट्रेलिया सरकार को भेजूंगा। गंगा सफाई का काम शुरू होने से पहले यह जानना जरूरी है कि ऑस्ट्रेलिया सरकार किस तरह इस काम में मदद कर सकती है।

संकट मोचन फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रफेसर विश्वंभर नाथ मिश्र ने ऑस्ट्रेलिया हाई कमिश्नर को सलाह दिया कि सबसे पहले गंगा में गिरते नालों को रोककर गंदे पानी का ट्रीटमेंट होना जरूरी है।


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